मालवी भाषा और साहित्य


अपने ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आया हूँ . अपनी  कुछ एक  नई किताबों  की तैयारी में व्यस्त था . नई किताबों में  मालवी भाषा और साहित्य हाल ही में आई है. मालवी में ही इसका परिचय दे रहा हूँ. 

अपना घर- आँगन की बोलीहुन की तरफ ध्यान देवा की जरुरत है. मालवी का वास्ते घना परयास भोत जरूरी है.म. प्र. ग्रन्थ अकादमी, भोपाल से म्हारा सम्पादन में छपी मालवी भाषा और साहित्य  पोथी में सन्त पीपाजी , सन्त सिंगाजी, आनन्दराव दुबे , बालकवि बैरागी, भावसार बा,नरहरि पटेल, मदनमोहन व्यास ,मोहन सोनी ,शिव चौरसिया  ने  दादा श्रीनिवास  जोशी जी की  रचना हुन सामल करी है. ई में दादा श्रीनिवास  जोशी जी की चार गद्य  रचना हुन  'धक्का को चमत्कार','राखोड्या' , 'नाना को नतीजो' ने 'सासू जी रीसाएगा' सामल है. इनी पोथी के  भोपाल , इन्दोर ने उज्जैन -तीन यूनीवर्सिती  में पढायो जई रियो है. 
 अपना ने सब मिली ने मालवी को मान बड़ानो है. मालवी को इतिहास सन 700 का एरे-मेरे से शुरू होए है. या वात म्हने पोथी मालवी भाषा और साहित्य में परमान का साथ राखी है.